अमेरिकन लंग्स एसोसिएशन के अनुसार इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF) पल्मोनरी फाइब्रोसिस का सबसे आम प्रकार है। इसमें फाइब्रोसिस का मतलब होता है घाव हो जाना, आइडियोपैथिक का अर्थ है जिस बीमारी की वजह का पता ना हो तथा पल्मोनरी का मतलब है फेफड़ों से सम्बंधित अर्थात ये एक ऐसी आम बिमारी है जिसमे फेफड़ो में घाव हो जाता है और जिस बिमारी का कारण अभी स्पष्ट नहीं है ।
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| इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस -Image made by AI |
1.क्या है इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF ) के सामान्य लक्षण ?
रोगी को ये बिमारी होने पर निम्न प्रकार के लक्षण महसूस होते है -
1. साँस लेने में कठिनाई महसूस होना
2. शरीर में ऑक्सीजन की कमी से थकान महसूस होना
3. मांसपेशियों में खिंचाव तथा तनाव
4. वजन कम होना
5. फेफड़ो द्वारा लम्बा साँस न खिंचा जाना
हालाँकि ये लक्षण धीरे धीरे गंभीर होने लगते है किन्तु ऐसे ज्यादातर मामलों में रोगी को अस्थमा ही होता है, क्योंकि ये बिमारी इतनी भी आम नहीं है । इसलिए ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है और अगर ये लक्षण आपको महसूस होते है अच्छे डॉक्टर से सलाह लें।
2.किस उम्र में होता है इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF)?
ये एक ऐसी बिमारी है जो अधेड़ उम्र के इंसान अर्थात लगभग 50 से 55 साल के बाद शुरू होती है; हालाँकि कुछ मामलों में ये थोड़ी पहले भी हो जाती है।
3.क्या धूम्रपान इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF) का कारण है ?
जैसा की आपको पता ही है इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF) के कारणों का अभी पता नहीं है, किन्तु हम ये मान सकते है की जो चीज फेफड़ो की क्रियाशीलता को कम करती है जैसे धूम्रपान या प्रदूषित वायु अथवा दूषित भोजन ; तो इसे भी हम इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF) के कारणों में शामिल कर सकते है।
4.क्या है अस्थमा और IPF में मुख्य अंतर ?
अस्थमा होने पर स्वास नली संकुचित हो जाती है क्योंकि स्वास नाली में सूजन आ जाती है , किन्तु IPF में फेफड़ो में घाव होने लगते है जिससे फेफड़े अच्छी तरह कार्य नहीं कर पाते।
5.इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF) का इलाज क्या है ?
डॉक्टर करण मेहरा के अनुसार इस बिमारी को शुरूआती दौर में टेबलेट्स की मदद से नियंत्रित किया जा सकता है, किन्तु बिमारी के गंभीर होने पर लंग्स ट्रांसप्लांट ही किया जाता है।
6.इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF) का आयुर्वेदिक इलाज क्या है ?
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| An ancient India's Ved curing disease image made by AI |
ऐसा कोई रोग नहीं जिसे आयुर्वेद ने ठीक नहीं किया हो। अगर इस रोग के लक्षणों को भी देखें , तो इसका भी उपचार आयुर्वेद में है -
IPF को ठीक करने के लिए जड़ी बूंटिया:
IPF को ठीक करने के लिए निम्न जड़ी बूंटियो की सहायता ली जा सकती है :-
1.वासा (Adhatoda Vasica): वासा कफ को कम करने में सहायता करती है और फेफड़ों को बल प्रदान करती है।
2.मुलेठी (Licorice): यह सूजन को कम करने और गले व श्वसन तंत्र को आराम देने में सहायता करती है।
3.गिलोय (Tinospora Cordifolia): प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
4.अश्वगंधा (Withania Somnifera): यह फेफड़ों को ऊर्जा प्रदान करता है और तनाव को कम करता है।
5.शतावरी (Asparagus Racemosus): फेफड़ों की मरम्मत में सहायक है और सूजन कम करता है।
पंचकर्म चिकित्सा के माध्यम से स्वास रोग तथा IPF का इलाज :
निम्न पंचकर्मो द्वारा IPF पर नियंत्रण पाया जा सकता है
1.वमन कर्म (Therapeutic Emesis): कफ दोष को शरीर से बाहर निकालने के लिए उपयोगी है।
2.नस्य कर्म (Nasal Therapy): नाक के माध्यम से औषधीय तेल डालने से श्वसन तंत्र को राहत मिलती है।
3.अभ्यंग और स्वेदन (Oil Massage and Steam): शरीर की थकान दूर करता है और फेफड़ों की सूजन कम करने में मदद करता है।
4.बस्ती कर्म (Medicated Enema): वात दोष को नियंत्रित करने के लिए उपयोगी है।
IPF को ठीक करने के लिए योग व साधना:
निम्न योग द्वारा IPF पर नियंत्रण पाया जा सकता है -
1.श्वास अभ्यास (प्राणायाम): अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका, और कपालभाति जैसे प्राणायाम फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाते हैं।
2.ध्यान और योग: तनाव को कम करने के लिए नियमित ध्यान और योग करें।
7.इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF) के लिए किन चीजों से परहेज करना चाहिए ?
अगर यह सिद्ध हो जाता है की आपको IPF है तो धूल, धूम्रपान, और प्रदूषण से दूर रहना शुरू कर दें और न ही ऐसे इंसान के पास बैठे जो धूम्रपान करता है । इसके अलावा अधिक ठंडे या तले-भुने खाद्य पदार्थों का सेवन न करें और डॉक्टर की सलाह से आयुर्वेदिक औषधियां शुरू करें या अन्य माध्यम से अपना इलाज कराएं ।इसी तरह की जानकारी के लिए आपके अपने ब्लॉग वायरल इंडिया टुडे न्यूज़ (Viral India Today News) को विजिट करते रहे और अपना प्यार इसी तरह हमसे साझा करते रहे।
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